Tuesday, 12 October 2010

उमर ने कश्मीर के विलय को अधूरा बताया

दैनिक जागरण 07 oct 2010
 श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल पर जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत संग पूर्ण विलय नहीं हुआ है। हमारा सशर्त अर्धमिलन हुआ है। इस समस्या का हल विशिष्ट तरीके से ही निकाला जा सकता है, जो राज्य के तीनों क्षेत्रों के लोगों के साथ भारत-पाक को भी मान्य हो। उमर ने विधानसभा में कहा,कश्मीर मसला दो मुल्कों के बीच का है, जिसमें हमारा राज्य बुरी तरह पिस चुका है। केंद्र सरकार भी इसे स्वीकार कर चुकी है। अगर यह विवाद नहीं है तो फिर शिमला समझौते से लेकर दिल्ली शिखर वार्ता तक इसकी बात क्यों की गई। यह एक पेचीदा और मुख्य मसला है, जिसे हमें हल करना है। इसके लिए यहां अलगाववादियों से भी बात करनी होगी और नई दिल्ली को इस्लामाबाद से भी। कश्मीर मसला अब हमेशा आगे ही रहेगा, इसे हल किए बिना ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे। समस्या का वही हल निकालना है जो राज्य के तीनों हिस्सों के अलावा दिल्ली और पाकिस्तान समेत सभी को कबूल हो। उमर ने कहा, जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट अंग है, अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए बार-बार क्यों चिल्लाना पड़ता है। अपने लोगों पर भरोसा होना चाहिए। हमारा इलहाक (विलय) हुआ है, लेकिन आप इसे जूनागढ़ और हैदराबाद से नहीं जोड़ सकते। वह पूरी तरह भारत में मिल गए थे, लेकिन हमारा पूर्ण विलय नहीं हुआ है। हमने अपना समझौता नहीं तोड़ा। हम अलग नहीं हुए, लेकिन समझौता आपने तोड़ा। समझौते का पालन दोनों तरफ से होना चाहिए। उमर का कहना था, कश्मीर समस्या कोई प्रशासकीय समस्या भी नहीं है, जो मेरे कुर्सी से हट जाने से हल हो जाएगी। अगर ऐसा होता तो मैं और पूरा मंत्रिमंडल सरकार से हट गया होता। सिर्फ कुर्सी ही नहीं, सियासत भी छोड़ देता। पीडीपी के लोग कहते थे कि यहां सियासी निजाम बदल दो, 90 प्रतिशत समस्या हल हो जाएगी। इसका मतलब जो हालात खराब हुए हैं, उसमें 90 प्रतिशत इनका किया धरा है, लेकिन मैं नहीं मानता। इन लोगों की इतनी ताकत नहीं कि ऐसा कर पाते। हां, इन लोगों ने हालात का फायदा जरूर लिया।


समझिये देशद्रोही नहीं तो क्या है ? 

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